| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति » अध्याय 28: अगले जन्म में पुरञ्जन को स्त्री-योनि की प्राप्ति » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 4.28.1  | नारद उवाच
सैनिका भयनाम्नो ये बर्हिष्मन् दिष्टकारिण: ।
प्रज्वारकालकन्याभ्यां विचेरुरवनीमिमाम् ॥ १ ॥ | | | | | | अनुवाद | | महर्षि नारद ने आगे कहा : हे राजा प्राचीनबर्हिषत्, तत्पश्चात् यवनराज जिसका नाम भय है, प्रज्वार, कालकन्या एवं अपने योद्धाओं सहित सारे संसार का भ्रमण करने लगा। | | | | महर्षि नारद ने आगे कहा : हे राजा प्राचीनबर्हिषत्, तत्पश्चात् यवनराज जिसका नाम भय है, प्रज्वार, कालकन्या एवं अपने योद्धाओं सहित सारे संसार का भ्रमण करने लगा। | | ✨ ai-generated | | |
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