हालांकि, अपना आसन ग्रहण करने से पहले, दक्ष यह देखकर बहुत नाराज हो गए कि भगवान शिव बैठे हुए हैं और उन्हें कोई सम्मान नहीं दे रहे हैं। उस समय, दक्ष बहुत क्रोधित हो गए, और उनकी आँखें लाल हो गईं, और वे भगवान शिव के खिलाफ बहुत कठोर शब्द बोलने लगे।
But before taking his seat, Daksha saw Shiva sitting and not showing him any respect, and considered it an insult. At that time Daksha became very angry. His eyes were burning. He started speaking very harsh words against Shiva.
तात्पर्य
लॉर्ड शिव, दक्ष के दामाद होने के नाते, उनसे अपेक्षित था कि वे अन्य लोगों के साथ खड़े होकर अपने ससुर का सम्मान करेंगे, परन्तु क्योंकि भगवान ब्रह्मा और भगवान शिव प्रमुख देवता हैं, उनकी स्थिति दक्ष से महान है। दक्ष, हालाँकि, यह बर्दाश्त नहीं कर सके, और उन्होंने इसे अपने दामाद द्वारा किया गया अपमान माना। पहले भी, वह भगवान शिव से बहुत अधिक संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि शिव बहुत गरीब दिखते थे और कपड़ों के मामले में कंजूस थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥