शिव ने लोकपालों के मान-सम्मान को मिट्टी में मिला दिया है और सदाचार के मार्ग को अपवित्र कर दिया है। लज्जाहीन होने के कारण उसे यह पता ही नहीं है कि कैसे आचरण करना चाहिए।
Shiva has tarnished the name and fame of the protectors of the world and has corrupted the path of virtue. Being shameless, he does not know how to behave.
तात्पर्य
डाक्सा उस सभा में एकत्रित महान ऋषियों के मन में यह प्रभाव डालना चाहता था कि शिव, देवताओं में से एक होने के कारण, अपने असभ्य व्यवहार से सभी देवताओं की अच्छी प्रतिष्ठा को बर्बाद कर दिया था। डाक्सा द्वारा भगवान शिव के विरुद्ध प्रयुक्त शब्दों को एक अलग अर्थ में भी समझा जा सकता है, एक अच्छे अर्थ में। उदाहरण के लिए, उन्होंने कहा कि शिव यश-घ्न हैं, जिसका अर्थ है "वह जो नाम और प्रसिद्धि को बर्बाद करता है।" इसलिए इसकी व्याख्या यह भी की जा सकती है कि वह इतने प्रसिद्ध थे कि उनकी प्रसिद्धि ने अन्य सभी प्रसिद्धि को मार डाला। फिर से, डाक्सा ने निरापत्रप शब्द का प्रयोग किया, जिसका प्रयोग दो अर्थों में भी किया जा सकता है। एक अर्थ है "वह जो अवरुद्ध है," और दूसरा अर्थ है "वह जो उन व्यक्तियों का भरण-पोषण करता है जिनके पास कोई और आश्रय नहीं है।" सामान्यतः भगवान शिव को भूतों का स्वामी कहा जाता है, या जीवित प्राणियों का निचला स्तर। वे भगवान शिव की शरण लेते हैं क्योंकि वह हर किसी के प्रति बहुत दयालु हैं और बहुत जल्दी संतुष्ट हो जाते हैं। इसलिए उन्हें आशुतोष कहा जाता है। ऐसे लोगों को, जो अन्य देवताओं या विष्णु से संपर्क नहीं कर सकते, भगवान शिव आश्रय देते हैं। इसलिए निरापत्रप शब्द का प्रयोग उस अर्थ में किया जा सकता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥