Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.19.16: इसी प्रकार की जानकारी मिलने पर राजा वेन के पौत्र ने तुरंत इन्द्र का पीछा शुरू कर दिया, जो बहुत जल्दी आसमान से होकर भाग रहा था। वह उस पर बहुत क्रोधित था और उसका पीछा करने लगा जैसे गिद्धराज रावण का पीछा कर रहा हो। | bhagavat अध्याय 4.19: राजा पृथु के एक सौ अश्वमेध यज्ञ । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं वैन्यसुत: प्रोक्तस्त्वरमाणं विहायसा ।
अन्वद्रवदभिक्रुद्धो रावणं गृध्रराडिव ॥ १६ ॥
अनुवाद
इसी प्रकार की जानकारी मिलने पर राजा वेन के पौत्र ने तुरंत इन्द्र का पीछा शुरू कर दिया, जो बहुत जल्दी आसमान से होकर भाग रहा था। वह उस पर बहुत क्रोधित था और उसका पीछा करने लगा जैसे गिद्धराज रावण का पीछा कर रहा हो।
Thus informed, the grandson of King Vena immediately started in pursuit of Indra, who was speeding across the sky. He became extremely angry with him and began to pursue him as if the vulture king were pursuing Ravana.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥