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श्लोक 4.14.42  |
नाङ्गस्य वंशो राजर्षेरेष संस्थातुमर्हति ।
अमोघवीर्या हि नृपा वंशेऽस्मिन् केशवाश्रया: ॥ ४२ ॥ |
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| अनुवाद |
| मुनियों ने निर्णय लिया कि राजर्षि अंग के वंशजों का नाश नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि इस वंश का वीर्य बहुत शक्तिशाली रहा है और इसकी संतानें प्रभु की भक्त रही हैं। |
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| मुनियों ने निर्णय लिया कि राजर्षि अंग के वंशजों का नाश नहीं होने देना चाहिए, क्योंकि इस वंश का वीर्य बहुत शक्तिशाली रहा है और इसकी संतानें प्रभु की भक्त रही हैं। |
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