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श्लोक 4.14.35  |
ऋषिभि: स्वाश्रमपदं गते पुत्रकलेवरम् ।
सुनीथा पालयामास विद्यायोगेन शोचती ॥ ३५ ॥ |
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| अनुवाद |
| ऋषिगण अपने अपने आश्रम लौट गए जिसके बाद राजा वेन की माँ सुनिता, अपने बेटे की मृत्यु से बेहद दुखी हो गई थी। उसने अपने बेटे के शव को कुछ द्रव्यों एवं मंत्रोच्चार द्वारा सुरक्षित रखने का फैसला किया। |
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| ऋषिगण अपने अपने आश्रम लौट गए जिसके बाद राजा वेन की माँ सुनिता, अपने बेटे की मृत्यु से बेहद दुखी हो गई थी। उसने अपने बेटे के शव को कुछ द्रव्यों एवं मंत्रोच्चार द्वारा सुरक्षित रखने का फैसला किया। |
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