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श्लोक 4.14.13  |
एवमध्यवसायैनं मुनयो गूढमन्यव: ।
उपव्रज्याब्रुवन् वेनं सान्त्वयित्वा च सामभि: ॥ १३ ॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार निश्चय करके ऋषिगण राजा वेन के पास गये। उन्होंने अपने क्रोध को छिपाकर मीठे वचनों से उसे मनाया-फुसलाया। फिर उन्होंने इस प्रकार भी कहा। |
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| इस प्रकार निश्चय करके ऋषिगण राजा वेन के पास गये। उन्होंने अपने क्रोध को छिपाकर मीठे वचनों से उसे मनाया-फुसलाया। फिर उन्होंने इस प्रकार भी कहा। |
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