Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.11.8: हे मेरे प्यारे बेटे, ये निर्दोष यक्ष जिनको तुम मारने जा रहे हो, यह कदापि अधिकारियों को स्वीकार नहीं है और यह हमारे कुल पर भी कलंक लगाएगा जिससे धर्म और अधर्म के नियमों को जानने की अपेक्षा की जाती है। | bhagavat अध्याय 4.11: युद्ध बन्द करने के लिए । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नास्मत्कुलोचितं तात कर्मैतत्सद्विगर्हितम् ।
वधो यदुपदेवानामारब्धस्तेऽकृतैनसाम् ॥ ८ ॥
अनुवाद
हे मेरे प्यारे बेटे, ये निर्दोष यक्ष जिनको तुम मारने जा रहे हो, यह कदापि अधिकारियों को स्वीकार नहीं है और यह हमारे कुल पर भी कलंक लगाएगा जिससे धर्म और अधर्म के नियमों को जानने की अपेक्षा की जाती है।
O son, this killing of innocent Yakshas that you are doing is neither acceptable to the authoritative men nor is it befitting for our lineage because you are expected to know the laws of Dharma and Adharma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥