भवस्य पत्नी तु सती भवं देवमनुव्रता ।
आत्मन: सदृशं पुत्रं न लेभे गुणशीलत: ॥ ६५ ॥
अनुवाद
सती नाम की वह सोलहवीं पुत्री भगवान शंकर की पत्नी थी, लेकिन उनकी कोई संतान नहीं हुई और वे हमेशा अपने पति की श्रद्धा से सेवा में लीन रहती थीं।
The sixteenth daughter named Sati was the wife of Lord Shiva, but she did not have any children although she was always devoted to serving her husband.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥