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श्लोक 4.1.6  |
तां कामयानां भगवानुवाह यजुषां पति: ।
तुष्टायां तोषमापन्नोऽजनयद् द्वादशात्मजान् ॥ ६ ॥ |
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| अनुवाद |
| यज्ञों के स्वामी भगवान ने बाद में दक्षिणा से विवाह किया, जो कि पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् को अपने पति रूप में पाने की इच्छुक थी। इस पत्नी से भगवान को बारह पुत्रों की प्राप्ति हुई। |
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| यज्ञों के स्वामी भगवान ने बाद में दक्षिणा से विवाह किया, जो कि पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् को अपने पति रूप में पाने की इच्छुक थी। इस पत्नी से भगवान को बारह पुत्रों की प्राप्ति हुई। |
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