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श्लोक 4.1.59  |
ताविमौ वै भगवतो हरेरंशाविहागतौ ।
भारव्ययाय च भुव: कृष्णौ यदुकुरूद्वहौ ॥ ५९ ॥ |
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| अनुवाद |
| कृष्ण के अंश विस्तार नर-नारायण ऋषि अब यदु और कुरु वंशो में क्रमशः कृष्ण और अर्जुन के रूप में प्रकट हुए हैं, ताकि दुनिया के बोझ को हल्का किया जा सके। |
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| कृष्ण के अंश विस्तार नर-नारायण ऋषि अब यदु और कुरु वंशो में क्रमशः कृष्ण और अर्जुन के रूप में प्रकट हुए हैं, ताकि दुनिया के बोझ को हल्का किया जा सके। |
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