Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.1.58: [मैत्रेय जी बोले :] हे विदुर, इस प्रकार देवताओं ने नर-नारायण ऋषि के रूप में प्रकट हुए भगवान की प्रार्थना के साथ पूजा की। भगवान ने उन पर दया की दृष्टि डाली और फिर गंधमादन पर्वत की ओर प्रस्थान कर गए। | bhagavat अध्याय 4.1: मनु की पुत्रियों की वंशावली । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सुरगणैस्तात भगवन्तावभिष्टुतौ ।
लब्धावलोकैर्ययतुरर्चितौ गन्धमादनम् ॥ ५८ ॥
अनुवाद
[मैत्रेय जी बोले :] हे विदुर, इस प्रकार देवताओं ने नर-नारायण ऋषि के रूप में प्रकट हुए भगवान की प्रार्थना के साथ पूजा की। भगवान ने उन पर दया की दृष्टि डाली और फिर गंधमादन पर्वत की ओर प्रस्थान कर गए।
[Maitreya said:] O Vidura, in this way the gods worshipped the Supreme Lord manifested in the form of the sages Nara-Narayana. The Lord looked at them with favour and then went towards the Gandhamadana mountain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥