| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति » अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली » श्लोक 53 |
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| | | | श्लोक 4.1.53  | ययोर्जन्मन्यदो विश्वमभ्यनन्दत्सुनिर्वृतम् ।
मनांसि ककुभो वाता: प्रसेदु: सरितोऽद्रय: ॥ ५३ ॥ | | | | | | अनुवाद | | नर-नारायण के अवतार के समय संपूर्ण संसार हर्ष से उमड़ पड़ा। सभी का मन शांत था, जिससे चारों दिशाओं में वायु, नदियाँ एवं पर्वत मनोहारी लगने लगे। | | | | नर-नारायण के अवतार के समय संपूर्ण संसार हर्ष से उमड़ पड़ा। सभी का मन शांत था, जिससे चारों दिशाओं में वायु, नदियाँ एवं पर्वत मनोहारी लगने लगे। | | ✨ ai-generated | | |
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