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श्लोक 4.1.45  |
मार्कण्डेयो मृकण्डस्य प्राणाद्वेदशिरा मुनि: ।
कविश्च भार्गवो यस्य भगवानुशना सुत: ॥ ४५ ॥ |
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| अनुवाद |
| मृकण्ड से मार्कण्डेय मुनि और प्राण से वेदशिरा ऋषि का जन्म हुआ। वेदशिरा के पुत्र उशना (शुक्राचार्य) थे, जिन्हें कवि भी कहा जाता था। इस प्रकार कवि भी भृगुवंशी थे। |
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| मृकण्ड से मार्कण्डेय मुनि और प्राण से वेदशिरा ऋषि का जन्म हुआ। वेदशिरा के पुत्र उशना (शुक्राचार्य) थे, जिन्हें कवि भी कहा जाता था। इस प्रकार कवि भी भृगुवंशी थे। |
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