श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  4.1.41 
चित्रकेतु: सुरोचिश्च विरजा मित्र एव च ।
उल्बणो वसुभृद्यानो द्युमान्शक्त्यादयोऽपरे ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
इन सातों ऋषियों के नाम निम्नलिखित हैं: चित्रकेतु, सुरोचि, विरजा, मित्र, उल्बण, वसुभृद्यान और द्युमान। वसिष्ठ की दूसरी पत्नी से कुछ अन्य अत्यंत योग्य पुत्र हुए थे।
 
इन सातों ऋषियों के नाम निम्नलिखित हैं: चित्रकेतु, सुरोचि, विरजा, मित्र, उल्बण, वसुभृद्यान और द्युमान। वसिष्ठ की दूसरी पत्नी से कुछ अन्य अत्यंत योग्य पुत्र हुए थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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