श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.1.24 
प्रणम्य दण्डवद्भूमावुपतस्थेऽर्हणाञ्जलि: ।
वृषहंससुपर्णस्थान् स्वै: स्वैश्चिह्नैश्च चिह्नितान् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
तदनंतर उन्होंने उन तीनों देवों की स्तुति की जो अपने-अपने वाहनों—बैल, हंस तथा गरुड़—पर सवार थे, और अपने हाथों में डमरू, कुश तथा चक्र धारण किये थे। ऋषि ने भूमि पर गिरकर उन्हें प्रणाम किया।
 
तदनंतर उन्होंने उन तीनों देवों की स्तुति की जो अपने-अपने वाहनों—बैल, हंस तथा गरुड़—पर सवार थे, और अपने हाथों में डमरू, कुश तथा चक्र धारण किये थे। ऋषि ने भूमि पर गिरकर उन्हें प्रणाम किया।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd