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श्लोक 4.1.19  |
प्राणायामेन संयम्य मनो वर्षशतं मुनि: ।
अतिष्ठदेकपादेन निर्द्वन्द्वोऽनिलभोजन: ॥ १९ ॥ |
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| अनुवाद |
| वहाँ महान ऋषि ने योगिक प्राणायाम के द्वारा अपने मन को एकाग्र किया और तब समस्त आसक्ति पर संयम करते हुए बिना भोजन ग्रहण किए केवल वायु का सेवन करते रहे और एक सौ वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहे। |
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| वहाँ महान ऋषि ने योगिक प्राणायाम के द्वारा अपने मन को एकाग्र किया और तब समस्त आसक्ति पर संयम करते हुए बिना भोजन ग्रहण किए केवल वायु का सेवन करते रहे और एक सौ वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहे। |
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