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bhagavat 4.1.19: वहाँ महान ऋषि ने योगिक प्राणायाम के द्वारा अपने मन को एकाग्र किया और तब समस्त आसक्ति पर संयम करते हुए बिना भोजन ग्रहण किए केवल वायु का सेवन करते रहे और एक सौ वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहे।   |   bhagavat अध्याय 4.1: मनु की पुत्रियों की वंशावली   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 1: मनु की पुत्रियों की वंशावली  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.1.19 
प्राणायामेन संयम्य मनो वर्षशतं मुनि: ।
अतिष्ठदेकपादेन निर्द्वन्द्वोऽनिलभोजन: ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
वहाँ महान ऋषि ने योगिक प्राणायाम के द्वारा अपने मन को एकाग्र किया और तब समस्त आसक्ति पर संयम करते हुए बिना भोजन ग्रहण किए केवल वायु का सेवन करते रहे और एक सौ वर्षों तक एक पैर पर खड़े रहे।
 
There the sage steadied his mind through yogic pranayama and then, controlling all attachments, he remained without food, breathing only air and standing on one leg for a hundred years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)