नदिया यमुना के तट पर कुछ दिन बिताने के बाद आत्म-साक्षात्कारी आत्मा विदुर गंगा नदी के किनारे पहुँचे, जहाँ महान ऋषि मैत्रेय स्थित थे।
After spending a few days on the banks of the Yamuna river, the self-realized soul Vidur reached the banks of the Ganga river where the sage Maitreya was located.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत चौथा अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥