श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 29: भगवान् कपिल द्वारा भक्ति की व्याख्या  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.29.43 
नभो ददाति श्वसतां पदं यन्नियमादद: ।
लोकं स्वदेहं तनुते महान् सप्तभिरावृतम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान के नियंत्रण में ही अंतरिक्ष विभिन्न ग्रहों को समायोजित करने की अनुमति देता है, जिन पर असंख्य जीव रहते हैं। उनके नियंत्रण में ही पूरा ब्रह्मांड अपने सात आवरणों के साथ विस्तार करता है।
 
भगवान के नियंत्रण में ही अंतरिक्ष विभिन्न ग्रहों को समायोजित करने की अनुमति देता है, जिन पर असंख्य जीव रहते हैं। उनके नियंत्रण में ही पूरा ब्रह्मांड अपने सात आवरणों के साथ विस्तार करता है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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