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श्लोक 3.29.43  |
नभो ददाति श्वसतां पदं यन्नियमादद: ।
लोकं स्वदेहं तनुते महान् सप्तभिरावृतम् ॥ ४३ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान के नियंत्रण में ही अंतरिक्ष विभिन्न ग्रहों को समायोजित करने की अनुमति देता है, जिन पर असंख्य जीव रहते हैं। उनके नियंत्रण में ही पूरा ब्रह्मांड अपने सात आवरणों के साथ विस्तार करता है। |
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| भगवान के नियंत्रण में ही अंतरिक्ष विभिन्न ग्रहों को समायोजित करने की अनुमति देता है, जिन पर असंख्य जीव रहते हैं। उनके नियंत्रण में ही पूरा ब्रह्मांड अपने सात आवरणों के साथ विस्तार करता है। |
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