श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 28: भक्ति साधना के लिए कपिल के आदेश  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  3.28.23 
जानुद्वयं जलजलोचनया जनन्या
लक्ष्म्याखिलस्य सुरवन्दितया विधातु: ।
ऊर्वोर्निधाय करपल्लवरोचिषा यत्
संलालितं हृदि विभोरभवस्य कुर्यात् ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
योगी को अपने हृदय में ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मीजी के कार्यों को स्थापित करना चाहिए। लक्ष्मीजी की पूजा सभी देवता करते हैं और वह सर्वोच्च व्यक्ति ब्रह्मा की माता हैं। उन्हें सदैव दिव्य भगवान् के चरणों और जाँघों की मालिश करते हुए देखा जा सकता है। इस प्रकार, वह सावधानी से उनकी सेवा करती हैं।
 
योगी को अपने हृदय में ऐश्वर्य की देवी लक्ष्मीजी के कार्यों को स्थापित करना चाहिए। लक्ष्मीजी की पूजा सभी देवता करते हैं और वह सर्वोच्च व्यक्ति ब्रह्मा की माता हैं। उन्हें सदैव दिव्य भगवान् के चरणों और जाँघों की मालिश करते हुए देखा जा सकता है। इस प्रकार, वह सावधानी से उनकी सेवा करती हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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