|
| |
| |
श्लोक 3.28.16  |
काञ्चीगुणोल्लसच्छ्रोणिं हृदयाम्भोजविष्टरम् ।
दर्शनीयतमं शान्तं मनोनयनवर्धनम् ॥ १६ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| कमर और कूल्हों पर करधनी लपेटे, वो अपने भक्तों के हृदय-कमल पर खड़े हैं। उन्हें देखना बेहद मनमोहक है और उनका शांत स्वरूप देखने वालों की आँखों और आत्माओं को खुशी देने वाला है। |
| |
| कमर और कूल्हों पर करधनी लपेटे, वो अपने भक्तों के हृदय-कमल पर खड़े हैं। उन्हें देखना बेहद मनमोहक है और उनका शांत स्वरूप देखने वालों की आँखों और आत्माओं को खुशी देने वाला है। |
| ✨ ai-generated |
| |
|