श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 28: भक्ति साधना के लिए कपिल के आदेश  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.28.16 
काञ्चीगुणोल्लसच्छ्रोणिं हृदयाम्भोजविष्टरम् ।
दर्शनीयतमं शान्तं मनोनयनवर्धनम् ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
कमर और कूल्हों पर करधनी लपेटे, वो अपने भक्तों के हृदय-कमल पर खड़े हैं। उन्हें देखना बेहद मनमोहक है और उनका शांत स्वरूप देखने वालों की आँखों और आत्माओं को खुशी देने वाला है।
 
कमर और कूल्हों पर करधनी लपेटे, वो अपने भक्तों के हृदय-कमल पर खड़े हैं। उन्हें देखना बेहद मनमोहक है और उनका शांत स्वरूप देखने वालों की आँखों और आत्माओं को खुशी देने वाला है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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