श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  3.24.40 
मात्र आध्यात्मिकीं विद्यां शमनीं सर्वकर्मणाम् ।
वितरिष्ये यया चासौ भयं चातितरिष्यति ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
मैं अपनी माता को भी इस परम ज्ञान के बारे में बताऊँगा, जो आध्यात्मिक जीवन का द्वार खोलता है, ताकि वह भी समस्त सकाम कर्मों के बंधनों को तोड़कर सिद्धि और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सके। इस प्रकार वह भी सभी भौतिक भय से मुक्त हो जाएगी।
 
मैं अपनी माता को भी इस परम ज्ञान के बारे में बताऊँगा, जो आध्यात्मिक जीवन का द्वार खोलता है, ताकि वह भी समस्त सकाम कर्मों के बंधनों को तोड़कर सिद्धि और आत्म-साक्षात्कार प्राप्त कर सके। इस प्रकार वह भी सभी भौतिक भय से मुक्त हो जाएगी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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