श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  3.24.36 
एतन्मे जन्म लोकेऽस्मिन्मुमुक्षूणां दुराशयात् ।
प्रसंख्यानाय तत्त्वानां सम्मतायात्मदर्शने ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में मेरा आगमन मुख्य रूप से सांख्य दर्शन की व्याख्या करने के लिए हुआ है। यह दर्शन उन व्यक्तियों के द्वारा आत्म-साक्षात्कार हेतु सर्वोच्च रूप से सम्मानित है, जो अनावश्यक भौतिक इच्छाओं की उलझनों से मुक्ति चाहते हैं।
 
इस संसार में मेरा आगमन मुख्य रूप से सांख्य दर्शन की व्याख्या करने के लिए हुआ है। यह दर्शन उन व्यक्तियों के द्वारा आत्म-साक्षात्कार हेतु सर्वोच्च रूप से सम्मानित है, जो अनावश्यक भौतिक इच्छाओं की उलझनों से मुक्ति चाहते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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