| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य » श्लोक 35 |
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| | | | श्लोक 3.24.35  | श्री भगवानुवाच
मया प्रोक्तं हि लोकस्य प्रमाणं सत्यलौकिके ।
अथाजनि मया तुभ्यं यदवोचमृतं मुने ॥ ३५ ॥ | | | | | | अनुवाद | | भगवान कपिल ने कहा- मेरे द्वारा प्रत्यक्ष अथवा शास्त्रों में कहे गए कथन संसार के लोगों के लिए पूर्ण रूप से प्रामाणिक होते हैं। हे मुनि, चूंकि मैंने पहले ही तुमसे कहा था कि मैं तुम्हारा पुत्र बनूँगा, इसलिए उसी सत्य को निभाने के लिए मैंने अवतार लिया है। | | | | भगवान कपिल ने कहा- मेरे द्वारा प्रत्यक्ष अथवा शास्त्रों में कहे गए कथन संसार के लोगों के लिए पूर्ण रूप से प्रामाणिक होते हैं। हे मुनि, चूंकि मैंने पहले ही तुमसे कहा था कि मैं तुम्हारा पुत्र बनूँगा, इसलिए उसी सत्य को निभाने के लिए मैंने अवतार लिया है। | | ✨ ai-generated | | |
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