श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  3.24.31 
तान्येव तेऽभिरूपाणि रूपाणि भगवंस्तव ।
यानि यानि च रोचन्ते स्वजनानामरूपिण: ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे राया, यद्यपि आपका कोई भौतिक रूप नहीं है, पर आपके अपने ही असंख्य रूप हैं। वे सभी सही मायने में आपके ही आध्यात्मिक रूप हैं, जो आपके भक्तों को सुखानुभूति कराते हैं।
 
हे मेरे राया, यद्यपि आपका कोई भौतिक रूप नहीं है, पर आपके अपने ही असंख्य रूप हैं। वे सभी सही मायने में आपके ही आध्यात्मिक रूप हैं, जो आपके भक्तों को सुखानुभूति कराते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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