| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 3: यथास्थिति » अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य » श्लोक 20 |
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| | | | श्लोक 3.24.20  | मैत्रेय उवाच
तावाश्वास्य जगत्स्रष्टा कुमारै: सहनारद: ।
हंसो हंसेन यानेन त्रिधामपरमं ययौ ॥ २० ॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री मैत्रेयजी कहते हैं— कर्दम मुनि एवं उनकी पत्नी देवहूति से इस प्रकार बातचीत करके ब्रह्म के निर्माता, जिन्हें हंस भी कहते हैं, चारों कुमारों और नारद के साथ अपने वाहन, हंस पर चढ़कर तीनों लोकों में से सर्वोत्कृष्ट लोक को चले गए। | | | | श्री मैत्रेयजी कहते हैं— कर्दम मुनि एवं उनकी पत्नी देवहूति से इस प्रकार बातचीत करके ब्रह्म के निर्माता, जिन्हें हंस भी कहते हैं, चारों कुमारों और नारद के साथ अपने वाहन, हंस पर चढ़कर तीनों लोकों में से सर्वोत्कृष्ट लोक को चले गए। | | ✨ ai-generated | | |
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