श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.24.17 
ज्ञानविज्ञानयोगेन कर्मणामुद्धरन् जटा: ।
हिरण्यकेश: पद्माक्ष: पद्ममुद्रापदाम्बुज: ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
सुनहरे बालों, कमल-दल से बनी आंखों और कमल-जैसी चरणों से कमल के अंक से सुशोभित कपिल मुनि अपने योग और शास्त्रीय ज्ञान के व्यवहार से इस भौतिक जगत में कामवासना को जड़ से उखाड़ देंगे।
 
सुनहरे बालों, कमल-दल से बनी आंखों और कमल-जैसी चरणों से कमल के अंक से सुशोभित कपिल मुनि अपने योग और शास्त्रीय ज्ञान के व्यवहार से इस भौतिक जगत में कामवासना को जड़ से उखाड़ देंगे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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