श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 24: कर्दम मुनि का वैराग्य  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.24.13 
एतावत्येव शुश्रूषा कार्या पितरि पुत्रकै: ।
बाढमित्यनुमन्येत गौरवेण गुरोर्वच: ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
पुत्रों को अपने पिता की इसी प्रकार सेवा करनी चाहिए। पुत्र को चाहिए कि वह अपने पिता अथवा गुरु के आदेश का पालन सम्मानपूर्वक "हाँ जी" कहकर करे।
 
पुत्रों को अपने पिता की इसी प्रकार सेवा करनी चाहिए। पुत्र को चाहिए कि वह अपने पिता अथवा गुरु के आदेश का पालन सम्मानपूर्वक "हाँ जी" कहकर करे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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