श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 23: देवहूति का शोक  »  श्लोक 36-37
 
 
श्लोक  3.23.36-37 
स तां कृतमलस्‍नानां विभ्राजन्तीमपूर्ववत् ।
आत्मनो बिभ्रतीं रूपं संवीतरुचिरस्तनीम् ॥ ३६ ॥
विद्याधरीसहस्रेण सेव्यमानां सुवाससम् ।
जातभावो विमानं तदारोहयदमित्रहन् ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
मुनि ने देखा कि देवहूति ने स्नान किया हुआ है और ऐसी चमक रही है मानो वह उनकी पुरानी पत्नी ही नहीं है। उसने राजकुमारी के रूप में अपना पुराना सौंदर्य वापस पा लिया था। वह उत्तम वस्त्र पहने हुए थी और उसके सुंदर स्तन ढके हुए थे। उसकी सेवा के लिए एक हजार गंधर्व कन्याएँ खड़ी थीं। हे शत्रुनाशक, मुनि को उसके लिए चाह हुई और उन्होंने उसे हवाई-प्रासाद में बैठा लिया।
 
The sage saw that Devahuti had taken her bath and was shining as if she was not his former wife. She had regained her former beauty like a princess. She had beautiful breasts, covered with the finest clothes. A thousand Gandharva girls were standing at her command. O conqueror of Shatru, the sage desired her and took her up to the air-palace.
तात्पर्य
अपने विवाह से पूर्व, जब देवहूति को उसके माता-पिता साधु कर्दम के समक्ष लाए थे, वह एक सर्वथा सुंदर राजकुमारी थी, और कर्दम मुनि को उसकी पूर्व सुंदरता का स्मरण था। लेकिन अपने विवाह के बाद, जब वह कर्दम मुनि की सेवा में लगी रही, वह एक राजकुमारी के रूप में अपने शरीर की देखभाल करने में असफल रही, क्योंकि ऐसी देखभाल का कोई साधन नहीं था; उसका पति एक कुटी में रहता था, और चूंकि वह हमेशा उसकी सेवा में लगी रहती थी, इसलिए उसकी राजसी सुंदरता लुप्त हो गई, और वह बिल्कुल एक सामान्य नौकरानी जैसी बन गई। अब, कर्दम मुनि की योग-शक्ति के आदेश द्वारा गंधर्व कन्याओं द्वारा नहलाए जाने के बाद, उसकी सुंदरता लौट आई, और कर्दम मुनि विवाह से पहले प्रदर्शित उसकी सुंदरता के प्रति आकर्षित हुए। एक युवती की असली सुंदरता उसके स्तन होते हैं। जब कर्दम मुनि ने देखा कि उनकी पत्नी के स्तनों को कितनी अच्छी तरह सजाया गया है, उनकी सुंदरता कई गुना बढ़ गई है, तो वे आकर्षित हुए, भले ही वे एक महान संत थे। इसलिए श्रीपाद शंकरचार्य ने पारलौकिकवादियों को चेतावनी दी है कि जो कोई पारलौकिक प्राप्ति के पीछे है उसे एक महिला के उभरे हुए स्तनों द्वारा आकर्षित नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि वे शरीर के भीतर वसा और रक्त की एक अंतःक्रिया के अलावा कुछ नहीं हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)