Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 3.23.20: उस प्रासाद में जगह-जगह जीवित हंस और कबूतरों के साथ-साथ नकली हंस और कबूतर भी थे जो इतने सजीव थे कि असली हंस उन्हें अपने जैसे ही जीवित पक्षी समझकर बार-बार अपनी गर्दन ऊपर उठा रहे थे। इस तरह वह प्रासाद इन पक्षियों की आवाजों से गूंज रहा था। | bhagavat अध्याय 3.23: देवहूति का शोक । bhagavat स्कन्ध 3: यथास्थिति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हंसपारावतव्रातैस्तत्र तत्र निकूजितम् ।
कृत्रिमान् मन्यमानै: स्वानधिरुह्याधिरुह्य च ॥ २० ॥
अनुवाद
उस प्रासाद में जगह-जगह जीवित हंस और कबूतरों के साथ-साथ नकली हंस और कबूतर भी थे जो इतने सजीव थे कि असली हंस उन्हें अपने जैसे ही जीवित पक्षी समझकर बार-बार अपनी गर्दन ऊपर उठा रहे थे। इस तरह वह प्रासाद इन पक्षियों की आवाजों से गूंज रहा था।
In that palace, along with live swans and pigeons, artificial swans and pigeons were also placed so lifelike that the real swans were raising their necks thinking them to be living birds like themselves. Thus that palace was echoing with the sounds of these birds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥