इसलिए भगवान श्रीकृष्ण सभी कारणों के मूल कारण हैं। इस प्रकार विष्णु का आध्यात्मिक धाम निस्संदेह शाश्वत है और यह सभी अभिव्यक्तियों की उत्पत्ति महाविष्णु का भी धाम है।
Therefore Lord Sri Krishna is called the primal cause of all causes. Thus the spiritual abode of Vishnu is undoubtedly eternal and it is also the abode of Maha Vishnu, the origin of all manifestations.
तात्पर्य
परमेश्वर महा-विष्णु जो स्वयं को योग-निद्रा में कार्ण समुद्र में विश्राम दे रहे हैं और अपनी श्वांस प्रक्रिया से असंख्य ब्रह्मांड बना रहे हैं, केवल भौतिक जगत की अस्थाई अभिव्यक्ति के लिए महात-तत्व में अस्थाई रूप से प्रकट होते हैं। वह भगवान श्री कृष्ण के ऐक पूर्ण अंश हैं, और इस प्रकार यद्यपि वह भगवान कृष्ण से भिन्न नहीं हैं, भौतिक जगत में एक अवतार के रूप में उनकी औपचारिक उपस्थिति अस्थाई है। परमेश्वर का मूल स्वरूप वास्तव में स्वरूप, या वास्तविक रूप है, और वह वैकुण्ठ दुनिया (विष्णुलोक) में हमेशा निवास करते हैं। शब्द महात्मानाः का यहाँ उपयोग महा-विष्णु को इंगित करने के लिए किया गया है, और उनकी वास्तविक अभिव्यक्ति भगवान कृष्ण हैं, जिन्हें परम कहा जाता है, जैसा कि ब्रह्म-संहिता में पुष्टि की गई है:
ईश्वरः परमः कृष्णः
सच्चिदानंद-विग्रहः
अनादिर् आदिर् गोविन्दः
सर्व-कारण-कारणं
"परमेश्वर कृष्ण हैं, भगवान का मूल व्यक्तित्व, जिन्हें गोविंद के रूप में जाना जाता है। उनका रूप शाश्वत है, आनंद और ज्ञान से भरा है, और वह सभी कारणों का मूल कारण है।"
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध तीन के अंतर्गत ग्यारहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥