श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 3: यथास्थिति  »  अध्याय 1: विदुर द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  3.1.22 
तस्यां त्रितस्योशनसो मनोश्च
पृथोरथाग्नेरसितस्य वायो: ।
तीर्थं सुदासस्य गवां गुहस्य
यच्छ्राद्धदेवस्य स आसिषेवे ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
सरस्वती नदी के तट पर ग्यारह तीर्थस्थल थे जिनके नाम हैं (१) त्रित (२) उशना (३) मनु (४) पृथु (५) अग्नि (६) असित (७) वायु (८) सुदास (९) गो (१०) गुह तथा (११) श्राद्धदेव। इनमें विदुर ने सभी तीर्थों का भ्रमण एवं ठीक से कर्मकांड किया।
 
There were eleven pilgrimage places on the banks of river Saraswati whose names are (1) Trit (2) Ushana (3) Manu (4) Prithu (5) Agni (6) Asit (7) Vayu (8) Sudas (9) Go (10) Guha and (11) Shraddhadev. Vidur went to all these and performed the rituals properly.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)