| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति » अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 2.8.7  | यदधातुमतो ब्रह्मन् देहारम्भोऽस्य धातुभि: ।
यदृच्छया हेतुना वा भवन्तो जानते यथा ॥ ७ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे ज्ञानी ब्राह्मण, दिव्य आत्मिक आत्मा भौतिक शरीर से भिन्न है। तो क्या उसे (आत्मा को) किसी कारणवश या अनायास ही शरीर मिलता है? यह आपको विदित है, अतः कृप्या मुझे समझाइए। | | | | हे ज्ञानी ब्राह्मण, दिव्य आत्मिक आत्मा भौतिक शरीर से भिन्न है। तो क्या उसे (आत्मा को) किसी कारणवश या अनायास ही शरीर मिलता है? यह आपको विदित है, अतः कृप्या मुझे समझाइए। | | ✨ ai-generated | | |
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