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श्लोक 2.8.4  |
शृण्वत: श्रद्धया नित्यं गृणतश्च स्वचेष्टितम् ।
कालेन नातिदीर्घेण भगवान् विशते हृदि ॥ ४ ॥ |
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| अनुवाद |
| जो लोग नियमित रूप से श्रीमद्भागवतम सुनते हैं और इसको अत्यन्त गम्भीरतापूर्वक ग्रहण करते हैं, उनके हृदय में अल्प समय में ही भगवान् श्रीकृष्ण प्रकट हो जाते हैं। |
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| जो लोग नियमित रूप से श्रीमद्भागवतम सुनते हैं और इसको अत्यन्त गम्भीरतापूर्वक ग्रहण करते हैं, उनके हृदय में अल्प समय में ही भगवान् श्रीकृष्ण प्रकट हो जाते हैं। |
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