| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति » अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न » श्लोक 3 |
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| | | | श्लोक 2.8.3  | कथयस्व महाभाग यथाहमखिलात्मनि ।
कृष्णे निवेश्य नि:सङ्गं मनस्त्यक्ष्ये कलेवरम् ॥ ३ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे अत्यंत भाग्यशाली शुकदेव गोस्वामी, कृपया मुझे श्रीमद्भागवत सुनाएँ ताकि मैं अपना मन परमात्मा, भगवान् श्रीकृष्ण में स्थिर कर सकूँ और इस प्रकार भौतिक गुणों से सर्वथा मुक्त होकर अपना यह शरीर त्याग सकूँ। | | | | हे अत्यंत भाग्यशाली शुकदेव गोस्वामी, कृपया मुझे श्रीमद्भागवत सुनाएँ ताकि मैं अपना मन परमात्मा, भगवान् श्रीकृष्ण में स्थिर कर सकूँ और इस प्रकार भौतिक गुणों से सर्वथा मुक्त होकर अपना यह शरीर त्याग सकूँ। | | ✨ ai-generated | | |
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