श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.8.27 
सूत उवाच
स उपामन्त्रितो राज्ञा कथायामिति सत्पते: ।
ब्रह्मरातो भृशं प्रीतो विष्णुरातेन संसदि ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
सूत गोस्वामी बोले - जब महाराजा परीक्षित ने भक्तों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की कथा कहने के लिए शुकदेव गोस्वामी को आमंत्रित किया तो वे अति प्रसन्न हुए।
 
सूत गोस्वामी बोले - जब महाराजा परीक्षित ने भक्तों के साथ भगवान श्रीकृष्ण की कथा कहने के लिए शुकदेव गोस्वामी को आमंत्रित किया तो वे अति प्रसन्न हुए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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