श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.8.26 
न मेऽसव: परायन्ति ब्रह्मन्ननशनादमी ।
पिबतोऽच्युतपीयूषम् तद्वाक्याब्धिविनि:सृतम् ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
हे विद्वान ब्राह्मण, अच्युत भगवान् के संदेश के अमृत का, जो आपकी वाणी रूपी समुद्र से बह रहा है, मेरे द्वारा पान करने से मुझे उपवास रखने के कारण होने वाली कोई भी थकान महसूस नहीं हो रही है।
 
हे विद्वान ब्राह्मण, अच्युत भगवान् के संदेश के अमृत का, जो आपकी वाणी रूपी समुद्र से बह रहा है, मेरे द्वारा पान करने से मुझे उपवास रखने के कारण होने वाली कोई भी थकान महसूस नहीं हो रही है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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