श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.8.24 
सर्वमेतच्च भगवन् पृच्छतो मेऽनुपूर्वश: ।
तत्त्वतोऽर्हस्युदाहर्तुं प्रपन्नाय महामुने ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
हे भगवत्स्वरूप महर्षि, कृपा करके मेरे उन सभी सवालों का जवाब दीजिए, जो मैंने आपसे पूछे हैं और उन सवालों का भी, जिन्हें पूछना मैं शुरू से ही भूल गया हूँ। चूंकि मैं आपके शरणागत हूं, इसलिए कृपया इस विषय में मुझे पूर्ण ज्ञान प्रदान करें।
 
हे भगवत्स्वरूप महर्षि, कृपा करके मेरे उन सभी सवालों का जवाब दीजिए, जो मैंने आपसे पूछे हैं और उन सवालों का भी, जिन्हें पूछना मैं शुरू से ही भूल गया हूँ। चूंकि मैं आपके शरणागत हूं, इसलिए कृपया इस विषय में मुझे पूर्ण ज्ञान प्रदान करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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