श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  2.8.23 
यथात्मतन्त्रो भगवान् विक्रीडत्यात्ममायया ।
विसृज्य वा यथा मायामुदास्ते साक्षिवद् विभु: ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
स्वतंत्र भगवान अपनी अंतरंग शक्ति से अपनी लीलाओं का आनंद लेते हैं और प्रलय के समय बाहरी शक्ति को ये लीलाएं समर्पित कर देते हैं, और स्वयं एक साक्षी के रूप में बने रहते हैं।
 
स्वतंत्र भगवान अपनी अंतरंग शक्ति से अपनी लीलाओं का आनंद लेते हैं और प्रलय के समय बाहरी शक्ति को ये लीलाएं समर्पित कर देते हैं, और स्वयं एक साक्षी के रूप में बने रहते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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