श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति  »  अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.8.16 
प्रमाणमण्डकोशस्य बाह्याभ्यन्तरभेदत: ।
महतां चानुचरितं वर्णाश्रमविनिश्चय: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
इसके साथ ही कृपया ब्रह्मांड के बाहरी तथा भीतरी विभागों, महापुरुषों के चरित्र तथा कार्यों और विभिन्न वर्णों एवं जीवन के चारों आश्रमों के वर्गीकरण का भी वर्णन करें।
 
इसके साथ ही कृपया ब्रह्मांड के बाहरी तथा भीतरी विभागों, महापुरुषों के चरित्र तथा कार्यों और विभिन्न वर्णों एवं जीवन के चारों आश्रमों के वर्गीकरण का भी वर्णन करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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