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श्लोक 2.8.16  |
प्रमाणमण्डकोशस्य बाह्याभ्यन्तरभेदत: ।
महतां चानुचरितं वर्णाश्रमविनिश्चय: ॥ १६ ॥ |
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| अनुवाद |
| इसके साथ ही कृपया ब्रह्मांड के बाहरी तथा भीतरी विभागों, महापुरुषों के चरित्र तथा कार्यों और विभिन्न वर्णों एवं जीवन के चारों आश्रमों के वर्गीकरण का भी वर्णन करें। |
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| इसके साथ ही कृपया ब्रह्मांड के बाहरी तथा भीतरी विभागों, महापुरुषों के चरित्र तथा कार्यों और विभिन्न वर्णों एवं जीवन के चारों आश्रमों के वर्गीकरण का भी वर्णन करें। |
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