| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 2: ब्रह्माण्ड की अभिव्यक्ति » अध्याय 8: राजा परीक्षित द्वारा पूछे गये प्रश्न » श्लोक 1 |
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| | | | श्लोक 2.8.1  | राजोवाच
ब्रह्मणा चोदितो ब्रह्मन् गुणाख्यानेऽगुणस्य च ।
यस्मै यस्मै यथा प्राह नारदो देवदर्शन: ॥ १ ॥ | | | | | | अनुवाद | | राजा परीक्षित ने शुकदेव गोस्वामी से प्रश्न किया कि नारद मुनि, जिनके श्रोता श्रीब्रह्मा द्वारा उपदेशित भाग्यशाली श्रोता हैं, उन्होंने निर्गुण भगवान् के दिव्य गुणों का किस तरह वर्णन किया और किन-किन के सामने बोले? | | | | राजा परीक्षित ने शुकदेव गोस्वामी से प्रश्न किया कि नारद मुनि, जिनके श्रोता श्रीब्रह्मा द्वारा उपदेशित भाग्यशाली श्रोता हैं, उन्होंने निर्गुण भगवान् के दिव्य गुणों का किस तरह वर्णन किया और किन-किन के सामने बोले? | | ✨ ai-generated | | |
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