Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.9.33: तब भगवान्, जोकि योगेश्वर हैं और हर किसी के हृदय में छिपे रहते हैं, ऋषि की नज़रों से ओझल हो गए। ठीक वैसे ही जैसे किसी अयोग्य व्यक्ति की सारी उपलब्धियाँ अचानक से गायब हो जाती हैं। | bhagavat अध्याय 12.9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तावत् स भगवान् साक्षाद् योगाधीशो गुहाशय: ।
अन्तर्दध ऋषे: सद्यो यथेहानीशनिर्मिता ॥ ३३ ॥
अनुवाद
तब भगवान्, जोकि योगेश्वर हैं और हर किसी के हृदय में छिपे रहते हैं, ऋषि की नज़रों से ओझल हो गए। ठीक वैसे ही जैसे किसी अयोग्य व्यक्ति की सारी उपलब्धियाँ अचानक से गायब हो जाती हैं।
Then the Lord, who is the Lord of all Yogs and who resides hidden in everyone's heart, disappeared from the sage's sight, just as all the achievements of an incapable person suddenly vanish.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥