Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 12.9.30: उन्होंने अपने सामने हिमालय पर्वत, पुष्पभद्रा नदी और अपने आश्रम को देखा, जहाँ उनका नर-नारायण ऋषियों से साक्षात्कार हुआ था। तभी मार्कण्डेय के सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को देखने पर, उस शिशु ने साँस छोड़ी, जिससे ऋषि उसके शरीर से बाहर निकल गए और प्रलय के सागर में गिर गए।   |   bhagavat अध्याय 12.9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन   ।   bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 9: मार्कण्डेय ऋषि को भगवान् की मायाशक्ति के दर्शन  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  12.9.30 
हिमालयं पुष्पवहां च तां नदीं
निजाश्रमं यत्र ऋषी अपश्यत ।
विश्वं विपश्यञ्छ्वसिताच्छिशोर्वै
बहिर्निरस्तो न्यपतल्ल‍याब्धौ ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने सामने हिमालय पर्वत, पुष्पभद्रा नदी और अपने आश्रम को देखा, जहाँ उनका नर-नारायण ऋषियों से साक्षात्कार हुआ था। तभी मार्कण्डेय के सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को देखने पर, उस शिशु ने साँस छोड़ी, जिससे ऋषि उसके शरीर से बाहर निकल गए और प्रलय के सागर में गिर गए।
 
He saw before him the Himalaya mountains, the Pushpabhadra river and his hut where he had seen the sages Nara-Narayana. Then, as the child exhaled in front of the entire world, the sages were pushed out of his body and thrown into the ocean of destruction by Markandeya.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)