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दृष्ट्वा निस्तेजसं कामं सगणं भगवान् स्वराट् ।
श्रुत्वानुभावं ब्रह्मर्षेर्विस्मयं समगात् परम् ॥ ३१ ॥
अनुवाद
जब बलशाली इन्द्र ने महर्षि मार्कण्डेय की योग-शक्ति के बारे में सुना तो उन्हें बहुत आश्चर्य हुआ। उन्होंने देखा कि कामदेव और उनके साथी महर्षि की उपस्थिति में कैसे शक्तिहीन हो गए थे।
When the powerful Indra heard about the yogic powers of Maharishi Markandeya, he was very surprised. He saw how Kamadeva and his companions became powerless in the presence of the Maharishi.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥