Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 12.8.16: ऋषि की आध्यात्मिक तपस्या को भंग करने के लिए, इन्द्रदेव ने कामदेव, स्वर्ग के सुंदर गंधर्वों, अप्सराओं, वसंत ऋतु और मलय पर्वत से चलने वाली चंदन की सुगंधयुक्त मंद हवा के साथ स्वयं लोभ और मद को भेज दिया। | bhagavat अध्याय 12.8: मार्कण्डेय द्वारा नर-नारायण ऋषि की स्तुति । bhagavat स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गन्धर्वाप्सरस: कामं वसन्तमलयानिलौ ।
मुनये प्रेषयामास रजस्तोकमदौ तथा ॥ १६ ॥
अनुवाद
ऋषि की आध्यात्मिक तपस्या को भंग करने के लिए, इन्द्रदेव ने कामदेव, स्वर्ग के सुंदर गंधर्वों, अप्सराओं, वसंत ऋतु और मलय पर्वत से चलने वाली चंदन की सुगंधयुक्त मंद हवा के साथ स्वयं लोभ और मद को भेज दिया।
To destroy the sage's spiritual penance, Indra sent greed and intoxication itself along with Kamadeva, beautiful Gandharvas, Apsaras, the spring season and the gentle breeze carrying the fragrance of sandalwood blowing from the Malaya mountains.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥