श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 7: पौराणिक साहित्य  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  12.7.9-10 
सर्गोऽस्याथ विसर्गश्च वृत्तिरक्षान्तराणि च ।
वंशो वंशानुचरितं संस्था हेतुरपाश्रय: ॥ ९ ॥
दशभिर्लक्षणैर्युक्तं पुराणं तद्विदो विदु: ।
केचित् पञ्चविधं ब्रह्मन् महदल्पव्यवस्थया ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मण, इस विषय के विद्वानों का कहना है कि एक पुराण में दस विशेषताएँ होती हैं-इस ब्रह्माण्ड की रचना, तत्पश्चात् लोकों और जीवों की रचना, सभी जीवों का पालन-पोषण, उनका रक्षण, विभिन्न मनुओं का शासन, महान राजाओं के राजवंश, ऐसे राजाओं के कार्य, संहार, कारण और परम आश्रय। अन्य विद्वानों का कहना है कि महापुराणों में यह दसों बातें होती है, जबकि छोटे पुराणों में केवल पाँच।
 
हे ब्राह्मण, इस विषय के विद्वानों का कहना है कि एक पुराण में दस विशेषताएँ होती हैं-इस ब्रह्माण्ड की रचना, तत्पश्चात् लोकों और जीवों की रचना, सभी जीवों का पालन-पोषण, उनका रक्षण, विभिन्न मनुओं का शासन, महान राजाओं के राजवंश, ऐसे राजाओं के कार्य, संहार, कारण और परम आश्रय। अन्य विद्वानों का कहना है कि महापुराणों में यह दसों बातें होती है, जबकि छोटे पुराणों में केवल पाँच।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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