श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 7: पौराणिक साहित्य  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.7.2 
शौक्लायनिर्ब्रह्मबलिर्मोदोष: पिप्पलायनि: ।
वेददर्शस्य शिष्यास्ते पथ्यशिष्यानथो श‍ृणु ।
कुमुद: शुनको ब्रह्मन् जाजलिश्चाप्यथर्ववित् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
शौक्लायनि, ब्रह्मबलि, मोदोष और पिप्पलायनि वेददर्श के शिष्य थे। सुनो मेरे से पथ्य के शिष्यों के नाम भी। मेरे प्रिय ब्राह्मण, वे हैं कुमुद, शुनक और जाजलि, जो सभी अथर्ववेद को बहुत अच्छी तरह से जानते थे।
 
शौक्लायनि, ब्रह्मबलि, मोदोष और पिप्पलायनि वेददर्श के शिष्य थे। सुनो मेरे से पथ्य के शिष्यों के नाम भी। मेरे प्रिय ब्राह्मण, वे हैं कुमुद, शुनक और जाजलि, जो सभी अथर्ववेद को बहुत अच्छी तरह से जानते थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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