| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग » अध्याय 6: महाराज परीक्षित का निधन » श्लोक 68 |
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| | | | श्लोक 12.6.68  | | यदु ह वाव विबुधर्षभ सवितरदस्तपत्यनुसवनमहर अहराम्नायविधिनोपतिष्ठमानानामखिलदुरितवृजिन बीजावभर्जन भगवत: समभिधीमहि तपन मण्डलम् ॥ ६८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे दीप्तिमान और सशक्त सूर्य देव, आप समस्त देवताओं के प्रधान हैं। मैं आपके अग्निशक्ति-युक्त मंडल का पूरे मनोयोग से ध्यान करता हूँ, क्योंकि जो कोई भी वैदिक विधि के अनुसार प्रतिदिन तिन बार आपकी पूजा करता है, उसके समस्त पाप कर्मों, उनके फलस्वरूप होने वाली तकलीफों को तथा इच्छा के मूल बीज को भी आप भस्म कर देते हैं। | | | | हे दीप्तिमान और सशक्त सूर्य देव, आप समस्त देवताओं के प्रधान हैं। मैं आपके अग्निशक्ति-युक्त मंडल का पूरे मनोयोग से ध्यान करता हूँ, क्योंकि जो कोई भी वैदिक विधि के अनुसार प्रतिदिन तिन बार आपकी पूजा करता है, उसके समस्त पाप कर्मों, उनके फलस्वरूप होने वाली तकलीफों को तथा इच्छा के मूल बीज को भी आप भस्म कर देते हैं। | | ✨ ai-generated | | |
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