श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 12: पतनोन्मुख युग  »  अध्याय 6: महाराज परीक्षित का निधन  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  12.6.51 
तासां स चतुर: शिष्यानुपाहूय महामति: ।
एकैकां संहितां ब्रह्मन्नेकैकस्मै ददौ विभु: ॥ ५१ ॥
 
 
अनुवाद
अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रज्ञावान व्यासदेव ने अपने चार शिष्यों को बुलाया और हे ब्राह्मण, उनमें से हर एक को इन चार संहिताओं में से एक-एक सौंप दिया।
 
अत्यंत शक्तिशाली एवं प्रज्ञावान व्यासदेव ने अपने चार शिष्यों को बुलाया और हे ब्राह्मण, उनमें से हर एक को इन चार संहिताओं में से एक-एक सौंप दिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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