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श्लोक 12.6.11  |
तक्षक: प्रहितो विप्रा: क्रुद्धेन द्विजसूनुना ।
हन्तुकामो नृपं गच्छन् ददर्श पथि कश्यपम् ॥ ११ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे ज्ञानी ब्राह्मणों, ब्राह्मण के क्रोधित पुत्र द्वारा भेजा गया नागराज तक्षक राजा को मारने के उद्देश्य से उनके तरफ बढ़ रहा था कि तभी उसने रास्ते में कश्यप मुनि को देखा। |
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| हे ज्ञानी ब्राह्मणों, ब्राह्मण के क्रोधित पुत्र द्वारा भेजा गया नागराज तक्षक राजा को मारने के उद्देश्य से उनके तरफ बढ़ रहा था कि तभी उसने रास्ते में कश्यप मुनि को देखा। |
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